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जीव जगत (The Living World) - सजीव क्या हैं और उनके प्रमुख लक्षण | कक्षा 11 जीव विज्ञान (Chapter 1)

जीव जगत (The Living World) - सजीव क्या हैं और उनके प्रमुख लक्षण | कक्षा 11 जीव विज्ञान (Chapter 1)

सजीव क्या हैं और उनके प्रमुख लक्षण |



नमस्ते दोस्तों! Zynforniya एजुकेशनल ब्लॉग में आपका स्वागत है।
कक्षा 11वीं के जीव विज्ञान (Biology) के इस सफर में आप सभी का स्वागत है। आज हम पहले अध्याय 'जीव जगत' (The Living World) की शुरुआत करने जा रहे हैं। इस आर्टिकल में हम बहुत ही सरल शब्दों में समझेंगे कि 'जीवन' या 'सजीव' होने का असली मतलब क्या है और विज्ञान की नजर में किसी वस्तु को जीवित मानने के क्या पैमाने हैं।
​यदि आप बोर्ड परीक्षा या नीट (NEET) जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, तो यह बेसिक कॉन्सेप्ट आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। चलिए शुरू करते हैं!

जीव विज्ञान क्या है? (What is Biology?)
​सजीवों के लक्षणों को जानने से पहले, आइए यह समझें कि जीव विज्ञान शब्द आया कहाँ से है।
• ​शाब्दिक अर्थ: जीव विज्ञान को अंग्रेजी में Biology कहते हैं, जो दो ग्रीक शब्दों से मिलकर बना है — 'Bios' (जिसका अर्थ है जीवन या Life) और 'Logos' (जिसका अर्थ है अध्ययन या Discourse/Study)। अर्थात, जीवन का अध्ययन ही जीव विज्ञान है।
• ​इतिहास: क्या आप जानते हैं कि 'बायोलोजी' शब्द का सबसे पहला प्रयोग सन 1802 ई० में लैमार्क (Lamarck) और ट्रेविरेनस (Treviranus) नामक वैज्ञानिकों ने किया था?
• ​परिभाषा: विज्ञान की वह शाखा जिसके अंतर्गत सभी प्रकार के सजीवों (पादप, जंतु और सूक्ष्मजीव) की उत्पत्ति, संरचना, विकास और उनके जैविक प्रक्रमों का अध्ययन किया जाता है, उसे जीव विज्ञान कहते हैं।

सजीव क्या है? (What is Living?)
​हमारे आस-पास दो तरह की चीजें मौजूद हैं — एक वे जो सांस लेती हैं, बढ़ती हैं (जैसे- पेड़-पौधे, कुत्ता, मनुष्य) और दूसरी वे जो जैसी हैं वैसी ही रहती हैं (जैसे- मेज, पत्थर, मोबाइल)।
वैज्ञानिक परिभाषा: जीव विज्ञान के अनुसार, सजीव वे अद्भुत और जटिल तंत्र (Systems) हैं जो स्व-प्रतिकृति (Self-replicating) यानी अपनी जैसी प्रतिलिपि बनाने में सक्षम हैं, विकासशील (Evolving) हैं, और बाहरी उद्दीपनों (External Stimuli) के प्रति प्रतिक्रिया देने की क्षमता रखते हैं।

​सजीवों के प्रमुख लक्षण (Characteristics of Living Organisms)
​किसी भी जीव को 'सजीव' घोषित करने के लिए वैज्ञानिकों ने कुछ प्रमुख लक्षणों को निर्धारित किया है। आज हम इसके दो सबसे शुरुआती और महत्वपूर्ण लक्षणों के बारे में विस्तार से पढ़ेंगे:

1. वृद्धि (Growth)
​सभी सजीवों का एक अनिवार्य लक्षण 'वृद्धि' है। जीवों में वृद्धि को दो मुख्य पैमानों से मापा जाता है: भार में वृद्धि होना और संख्या में वृद्धि होना
• ​कोशिका विभाजन (Cell Division): बहुकोशिकी जीव (जैसे मनुष्य या पौधे) कोशिका विभाजन द्वारा बढ़ते हैं। पौधों में यह वृद्धि जीवन भर चलती रहती है, जबकि प्राणियों में वृद्धि एक निश्चित आयु तक ही होती है (हालांकि कोशिकाओं की मरम्मत के लिए कोशिका विभाजन जीवनभर चलता है)।
• ​एककोशिकी जीव: अमीबा या बैक्टीरिया जैसे जीव भी कोशिका विभाजन द्वारा अपनी संख्या बढ़ाते हैं।
• ​एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक तथ्य (अपवाद): क्या निर्जीवों में वृद्धि नहीं होती? विज्ञान कहता है कि पर्वत, रेत के टीले या बड़े पत्थर भी समय के साथ आकार में बड़े होते हैं, क्योंकि उनकी सतह पर बाहरी पदार्थों का जमाव होता है।
• ​निष्कर्ष: सजीवों में वृद्धि आंतरिक (Internal) होती है, जबकि निर्जीवों में बाहरी। इसलिए, केवल 'वृद्धि' को सजीवों का एक संपूर्ण या विशिष्ट लक्षण (Defining Property) नहीं माना जा सकता। इसके अलावा, मृत जीव कभी वृद्धि नहीं करते।

2. जनन (Reproduction)
​अपनी प्रजाति के अस्तित्व को इस धरती पर बनाए रखने के लिए अपने जैसे नए जीव को जन्म देना ही 'जनन' कहलाता है।
• ​बहुकोशिकी जीवों में: उच्च श्रेणी के जीवों में जनन का अर्थ है ऐसी संतान उत्पन्न करना जिसके लक्षण माता-पिता से मिलते-जुलते हों। यह मुख्य रूप से लैंगिक जनन (Sexual Reproduction) द्वारा होता है।
• ​अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction): कवक (Fungi) लाखों अलैंगिक बीजाणुओं (Spores) द्वारा वंश बढ़ाते हैं। यीस्ट और हाइड्रा में मुकुलन (Budding) होता है, जबकि प्लेनेरिया जैसे जीवों में पुनरुद्भवन (Regeneration) यानी कटे हुए हिस्से से पूरा नया जीव बन जाने की क्षमता होती है।
• ​एककोशिकी जीवों में: अमीबा या जीवाणुओं के मामले में 'वृद्धि' और 'जनन' दोनों का मतलब एक ही होता है — कोशिका का विभाजित होकर संख्या में बढ़ना।
• ​वैज्ञानिक अपवाद: कुछ ऐसे भी जीव हैं जो जीवित तो हैं, लेकिन जनन नहीं कर सकते; जैसे- खच्चर (Mule), बंध्य श्रमिक मधुमक्खियां (Worker Bees), और कुछ अनुर्वर मानव युगल (Infertile Human Couples)।
• ​निष्कर्ष: चूंकि ये जीव जनन नहीं कर सकते फिर भी सजीव हैं, इसलिए जनन को भी सजीवों का 'विशिष्ट लक्षण' (Defining property) नहीं कहा जा सकता, हालांकि कोई भी निर्जीव जनन नहीं कर सकता।

आज हमने क्या सीखा? (Quick Summary)
• ​बायोलॉजी शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग लैमार्क और ट्रेविरेनस ने 1802 में किया था।
• ​सजीवों में होने वाली वृद्धि आंतरिक होती है, जबकि निर्जीवों में बाहरी।
• ​वृद्धि और जनन सजीवों के लक्षण तो हैं, लेकिन इन्हें सजीवों का "विशिष्ट/परिभाषक लक्षण" (Defining Feature) नहीं माना जा सकता क्योंकि इनके कुछ अपवाद मौजूद हैं।

अगले आर्टिकल में हम पढ़ेंगे: सजीवों के अन्य महत्वपूर्ण लक्षण जैसे उपापचय (Metabolism), चेतना (Consciousness) और कोशकीय संगठन के बारे में।
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